Sunday, February 17, 2013

बहन के साथ मज़ा

मेरा नाम अमित है और मै २० साल का एक युवक हूँ मेरी दीदी का नाम संगीता है और उसकी उमर क़रीब २६ साल है दीदी मुझसे ६ साल बड़ी हैं हम लोग एक मिडल-कलास फमिली है और एक छोटे से फ्लैट मे मुंबई मे रहते हैं.

छोटा भाई

मेरा नाम आशा है मेरा छ्होटा भाई दासवी मैं पढ़ता है वह गोरा चित्ता और क़रीब मेरे ही बराबर लंबा भी है मैं इस समय 19 की हूँ और वह 15 का. मुझे भय्या के गुलाबी हूनत बहुत प्यारे लगते हैं दिल करता है की बस चबा लूं. पापा गुल्फ़ मैं है और माँ गोवेर्नमेंट जॉब मैं माँ जब जॉब की वजह से कहीं बाहर जाती तू घर मैं बस हम दो भाई बहन ही रह जाते थे. मेरे भाई का नाम अमित है और वह मुझे दीदी कहता है एक बार माँ कुच्छ दीनो के लिए बाहर गयी थी. उनकी एलेक्टीओं दूत्य लग गयी थी. माँ को एक हफ़्ते बाद आना था. रात मैं दिननेर के बाद कुच्छ देर ट्व देखा फिर अपने-अपने कमरे मैं सोने के लिए चले गायेक़रीब एक आध घंटे बाद प्यास लगने की वजह से मेरी नींद खुल गयी अपनी सीदे तबले पैर बोट्थले देखा तो वह ख़ाली थी. मैं उठकर कित्चें मैं पानी पीने गयी तू लौटते समय देखा की अमित के कमरे की लिघ्ट ओं और दरवाज़ा भी तोड़ा सा खुला था. मुझे लगा की शायद वह लिघ्ट ओफ़्फ़ करना भूल गया है मैं ही बंद कर देती हूँ. मैं चुपके से उसके कमरे मैं गयी लेकिन अंदर का नज़ारा हैरान मैं हैरान हो गयी अमित एक हाथ मैं कोई द पकड़कर उसे पार् रहा था और दूसरे हाथ से अपने ताने हुए लंड को पकड़कर मूट मार रहा था. मैं कभी सोच भी नही सकती की इतना मासूम लगने वाला दासवी का यह छ्ोक्रा ऐसा भी कर सकता है मैं दूं साढ़े चुपचाप खड़ी उसकी हरकत देखती रही, लेकिन शायद उसे मेरी उपस्थिति का आभास हो गया. उसने मेरी तरफ़ मुँह फेरा और दरवाज़े पैर मुझे खड़ा हैरान चौंक गया. वह बस मुझे देखता रहा और कुच्छ भी ना बोल पाया. फिर उसने मुँह फैर कर द टाकिएे के नीचे छ्छूपा दी. मुझे भी समझ ना आया की क्या करूँ. मेरे दिल मैं यह ख़्याल आया की कल से यह लड़का मुझसे शरमायगा और बात करने से भी कत्राएगा. घर मैं इसके अलावा और कोई है भी नही जिससे मेरा मनन बहालता. मुझे अपने दिन याद आए. मैं और मेरा एक काज़ीन इसी उमर के थे जबसे हमने मज़ा लेना शुरू किया था तू इसमे कौन सी बड़ी बात अगर यह मूट मार रहा था.

गाव का डॉक्टर

एमबीबीएस की डेग्री मिलते ही मेरी पोस्टिंग उत्तर प्रदेश के एक गाओं में हो गयी गाँव'वासियों ने आप'ने जीवन में गाओं में पह'ली बार कोई डॉकटोर देखा था. इसके पहले गाओं नीम हाकीमों , ओझाओं और झार फूँक करनेवालों के हवाले था. जल्द ही गाओं के लोग एक भगवान की तरह मेरी पूजा कर'ने लग गाये रोज़ ही काफ़ी मरीज़ आते थे और मैं जल्दी ही गाँव की ज़िंदगी मैं बड़ा महटवा पूरण समझा जाने लगा. गाँव वाले अब सलाह के लिए भी मेरे पासस आने लगे. मैं भी किसी भी वक़्त माना नहीं करता था अपने मरीज़ों को आने के लिए
गाँव के बाहर मेरा बंगलोव था. इसी बंगलोव मैं मेरी दिस्पेन्सरी भी थी. गाँव मैं मेरे साल भर गुज़ारने के बाद की बात होगी ये. इस गाँव मैं लड़कियाँ और औरतें बड़ी सुंदर सुंदर थी. एईसी ही एक बहुत ख़ूबसूरत लड़की थी गाँव के मास्टेरजी की. नाम भी उसका था गोरी. सच कहूँ तो मेरा भी दिल उसपर आ गया था पैर होनी को कुच्छ और मंज़ूर था. गाँव के ठाकुर के बेटे का भी दिल उसपर आया और उनकी शादी हो गई. पैर जोड़ी बड़ी बेमेल थी. कहाँ गोरी, और कहाँ राजन.

Wednesday, December 19, 2012

বাসে মাগি বিলাস

বাসের মধ্যে খুব ঠাসাঠাসি ভীড়।কোনমতে একটা সীট দখল করে বসে পড়লাম। গরমে অস্থির লাগছিল।বাসটা ছাড়তে না ছাড়তেই দাড়ানো লোকজন প্রায় গায়ের উপর এসে পড়ছে।খুব বিরক্ত লাগে।বসেও শান্তি নেই।ধাক্কাধাক্কির মধ্যে দুটি মেয়েও আছে দেখলাম। তার একজন ধাক্কায় এসে দাড়িয়ে স্থির হয়েছে আমার মাথার পেছনের সীট ধরে। তাকিয়ে দেখি মেয়েটার বয়স ১৭/১৮ মতো হবে। কমও হতে পারে। কিন্তু সাজগোজ বেশ উগ্র। টাইট কামিজ ভেদ করে স্তন দুটি ব্রার ভেতর আবদ্ধ দেখা যাচ্ছে খালি চোখেও। দুইনাম্বার নাকি? হোক, আমার কি।

প্রথম অভিজ্ঞতা

হ্যালো ওরিন বলছি ।আজ আমি আপনাদের আমার এক খালাতো বোনের কথা বলবো আপনাদের ।দুই বছর আগের কথা । সবে মাত্র ইন্টার দিব ।একসাথে আমরা কলেজের রুম শেয়ার করতাম । আমাদের কলেজের সব কয়টি মেয়ে ছিল একেবারে খাসা মাল ।মেয়েদের ব্যাপারে আমার এক আলাদা রকমের আকর্ষণ ছিল , ছিল অন্য রকম এক স্বপ্ন । কিন্তু আমার সপ্নের বাস্তবায়ন হয়নি তখনও । আমার রুমমেট ছিল খালাতো বোন লিলি । পাশাপাশি পরবর্ত একবছরে অনেক ক্লোজ একসাথে যেভাবে আমরা গড়ে উঠছিলাম তেমনি করে গড়ে উঠছিল একের সাথে অন্যের সবকিছু খুলে বলার অভ্যাস ।দুনিয়ার এমন কোন চীজ ছিলনা যে আমরা শেয়ার করতাম না । একসাথে থেকে আমরা স্বপ্ন দেখতাম সবকিছুর , আমাদের ব্যক্তিগত লাইফ নিয়ে ,সেক্স নিয়ে ছেলেদের নিয়ে ।এর হাজারটা বিষয় নিয়ে যার কোন সিমা পরিসিমা থাকতো না ।

রাস্তায় কচি মাগী পেয়ে ঠাপিয়ে দিলাম ট্রাকে

আমাদের লরি সুরাটের কাছে আনন্দ বলে একটি ছোটো শহর আছে সেখান দিয়ে পেরচ্ছিল I সন্ধা প্রায় সাতটা বাজে কিন্তু সেখানে তখনও সূর্য অস্ত যায় নি I আমরা খুব তারাই তো ছিলাম না কিন্তু আমরা চায় ছিলাম যতো তারাতারি সম্ভব সুরাট পৌছে যায় I পেয়াজের দাম আকাশ ছোয়া, আর সুরাটে যদি তারাতারি আমাদের গাড়ি খালি হয়ে যায় তাহলে সেখান থেকে আমরা কিছু না কিছু পুনা নিয়ে যেতে পারবো I যেহেতু পুনা থেকে আমাদের পেয়াজ নিয়ে দিল্লি যাওয়ার ছিলো তাই সুরাট আর পুনার মাঝে যা আমরা নিয়ে যেতাম সেটা আমাদের আলাদা লাভ হতো Iলরির ব্যবসা খুব একটা লাভ জনক নয় কিন্তু আমার কাছে কোনো উপায় নেই I তাই আমি কোনরকম একটা লরি কিনেছি আর আমি নিজেই সেটা চালায় I যেহেতু ডিজেলের দাম আকাশ ছোয়া এছাড়া সব সময় কোনো না কোনো খরচ লেগেই থাকে গাড়ির পেছনে তাই খরচে পেরে উঠতে পারি না I এবার একটা সুযোগ পেয়ে ছিলাম পেয়াজের মাধ্যমে কিছু ইনকাম করার Iখুব সুন্দর চার লেনের রাস্তা ছিলো তাই গাড়ি চালাতে দারুন আনন্দ অনুভব হচ্ছিলো কারণ ভারতের বেশির ভাগ রাস্তায় খারাপ তবে এখন একটু উন্নতি হচ্ছে I

অসমাপ্ত চুদা কাহিনী

অসমাপ্ত চুদা কাহিনী
বাইরে ঝিরিঝিরি বৃষ্টি পড়ছে। গ্রীষ্মের খরতাপে অতিষ্ট শহরবাসির দুঃখে ব্যথিত হয়ে যেনমন খারাপ করে আকাশ তার কান্নার জল এ ধরনীতে ছড়িয়ে দিচ্ছে। অমি জানালার পাশে গালে হাত দিয়ে বসে আছে। পৃথিবীর এ বিমর্ষ রূপ দেখতে দেখতে সে নিজেও যেন এর মাঝে হারিয়ে যেতে চাইছে। কদিন হল অমি তার এলাকার এক পরিচিত ভাইয়ের বাসায় আছে। বাবা-মা সপ্তাহখানেকের ছুটি কাটাতে কক্সবাজার গিয়েছে। রওনা দেওয়ার দিনই ওর ক্লাস টেনের টেস্ট পরীক্ষার শেষদিন ছিল বলে বাসার কাছেই থাকায় ওকে এখানে রেখে গিয়েছেন ওরা, ওদের সাথে অনেকদিনের পরিচয় অমিদের। বাসায় লোক বলতে অবশ্য এখন ওর নীলা ভাবীই আছে।

.......কচি কচি মাল

তখন বয়স ১০ হবে| ভালো করে যৌনতা সম্মন্ধে জ্ঞান হয়নি| আমার এক বন্ধু একটু advanced আমার চেয়ে| ওরকাছে নারী দেহের ব্যাপারে কিছুটা তালিম পেয়েছি| লুকিয়ে ওর বাবার porno মাগাজিনে নগ্ন মেয়ের ছবি দেখেছি| পশ্চিমা মেয়েদের চমদ্কারশরীর দেখে কেমন যেনো অনুভূতি হত – বিশেষ করে ওদের দুধ আর পাছা দেখে আমি খুব আনন্দ পেতাম| আমার বাল ওয়ালা মেয়েদের ভোদা বেশি ভালো লাগতো| মেয়েদের শরীরের ওই অঙ্গটা আমাকে আকৃষ্ট করতো তখন থেকে|সেবার গরমের বন্ধে আমার এক খালা বেড়াতে এলেন উনার মেয়েকে নিয়ে | মেয়ের বয়স ১২-১৩ হবে| প্রথমে তেমন খেয়াল করিনি কিন্তু পরে দেখলাম ছোট আপেলের মতন স্তন| আমরা বাসার ভিতর নানা খেলায় মাতলাম ভাই বোনদের নিয়ে| একটা খেলায় একে অপরকে দৌড়ে ধরার কথা| খেলতে খেলতে মাথায় দুষ্ট বুদ্ধি চাপলো – সুযোগ পেলে আমি ওকে ধরার বাহানায় স্তন ছুয়েঁ দিতাম|
 
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